
Bihar बिहार: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोलियम उत्पादों की बचत संबंधी अपील के बाद बिहार सरकार ने ईंधन खपत कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने की घोषणा की है। राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस दिशा में नई पहल की जानकारी देते हुए कहा कि डीजल और पेट्रोल की बचत को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर इस फैसले की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री कारकेड में अब वाहनों की संख्या को न्यूनतम रखने का निर्णय लिया गया है। इस कदम का उद्देश्य सरकारी स्तर पर ईंधन की खपत को नियंत्रित करना और जनता के बीच भी संसाधनों के बेहतर उपयोग का संदेश देना है।
सरकार का मानना है कि ईंधन बचत न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आवश्यक है। वाहनों की संख्या कम करने से पेट्रोल और डीजल की खपत में कमी आएगी, जिससे प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद लिया गया है, जिसमें उन्होंने देशभर में पेट्रोलियम उत्पादों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया था। बिहार सरकार इस दिशा में कदम उठाकर केंद्र सरकार की ऊर्जा बचत नीति को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
इस नई व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री कारकेड में केवल आवश्यक वाहनों को ही शामिल किया जाएगा। अनावश्यक वाहनों की संख्या घटाई जाएगी, जिससे प्रशासनिक यात्रा के दौरान ईंधन की खपत कम हो सके। इसके अलावा सरकारी स्तर पर अन्य विभागों में भी ईंधन बचत को लेकर समीक्षा की जा रही है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में राज्य के अन्य विभागों में भी ईंधन उपयोग को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की जा सकती हैं। इसमें सरकारी वाहनों के उपयोग को अधिक कुशल बनाने, अनावश्यक यात्रा को कम करने और वैकल्पिक साधनों को अपनाने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो राज्य स्तर पर ईंधन खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। इससे न केवल सरकारी खर्च में बचत होगी, बल्कि पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
इस पहल को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं, जो अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
फिलहाल, बिहार सरकार इस नीति को धीरे-धीरे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है और आने वाले दिनों में इसके प्रभाव का आकलन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने संकेत दिए हैं कि सरकार हर स्तर पर संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए प्रतिबद्ध है।





